खाली-पीली

बुधवार, अगस्त 31, 2005

केनेडी क्यों मुस्कराये ?

विक्रम विक्रम विक्रम विक्रम
बेताल बेताल बेताल बेताल

शिर्षक गीत के समाप्त होते ही विक्रम (उर्फ विक्रमादित्य उर्फ विक्की) अपनी तलवार लहराते हुवे, बेताल को कन्धे पर डाल शम्शान की ओर चल दिया. काली घन्घोर रात थी, हाथ को हाथ सुझाइ नही देता था. दिस‍बर की रात की तरह ठंड पड रही थी. ठंड के मारे विक्की के मुंह से एक शब्द बाहर नही आ रहा था. बेताल विक्की की पिठ पर लदे लदे बोर हो गया. बेताल ने बोलना शुरू किया
"विकी क्या तु पागल हो गया है ? सारी दुनिया जहां इस रात मे अपने अपने घरो मे रजाई मे घुस कर सो रहे है और तु इस शम्शान मे भटक रहा है ? तेरा ये धिरज, शौर्य और उदारता धन्य है. मै तेरे मनोरंजन के लिये एक किस्सा सुनाता हुं, सुन "


ऐसा कहते हुवे बेताल ने विक्रम को एक विश्व राजनीती का एक किस्सा सुनाना प्रारम्भ किया.

प्राचिन काल की बात है, उस समय ख्रुश्चेव रूस के तथा केनेडी अमेरीका के राष्ट्रपति थे. काफी बातचित और वार्ताओं के दौर के बाद शांती समझौते का प्रारूप तैयार हुवा. दोनो पक्षो के हस्ताक्षर की देर थी. सारी शर्ते दोनो पक्षो ने हां ना हा ना करते हुवे मान ली. बस अब दोनो को कलम हाथ मे लेकर हस्ताक्षर करना ही बचा हुवा था.

लेकिन अचानक ख्रुश्चेव को पता नही क्या सनक सुझी, उन्होने हस्ताक्षर से पहले ये शर्त लगा दी कि केनेडी को आदम और हव्वा (विश्व के पहले स्त्री और पुरूष) को कम्युनीस्ट होने की मान्यता देनी पडेगी. पल भर के केनेडी भौंच्चके रह गये. लेकिन अगले ही पल मुस्कराते हुवे उन्होने आदम और हव्वा को कम्युनीस्ट होने की मान्यता दे दी.


ये किस्सा सुना कर बेताल ने कहा
""विक्की अब तु मुझे बता कि केनेडी क्यों मुस्कराये और उन्होने आदम और हव्वा को कम्युनीस्ट होने की मान्यता क्यों दी ? अगर तु मेरे प्रश्न का जवाब नही देगा तो तेरे सर के टुकडे टुकडे हो जायेगें !"


"बेताल!"
विक्रम ने कहा
"तुझे कामन सेन्स नाम की कोइ चिज नही है ! जरा दिमाग का उपयोग कर. तेरे सिर्फ जिभ चलती है. तेरे प्रश्न का उत्तर कितना आसान है. केनेडी एक चतुर राजनेता थे. उन्होने हंसी खुशी आदम और हव्वा को कम्युनिस्ट होने की मान्यता दी. क्योंकि उन दोनो(आदम और हव्वा) के पास शरीर पर पहनने के लिये एक सुत तक कपडा नही था, रहने के लिये घर नही था और ज‍गंल ज‍गंल भटकना उनकी नियती थी. खाने के लिये उनके पास सेब के अलावा कुछ नही था लेकिन उन्हे लगता था कि वो स्वर्ग मे है. ऐसा सिर्फ कम्युनिस्म मे हो सकता है. इसिलिये केनेडी मुस्कराये और आदम और हव्वा को कम्युनीस्ट होने की मान्यता दी ."


इस तरह विक्रम का मौन भंग हुवा. बेताल ने कहा
"विक्की तु बोला और मै चला ! हा हा हा हा हा हा "


बेताल वापिस उडकर अपने पेड पर जाकर उल्टा लटक गया.

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